स्मार्ट चोरी, सुस्त सिस्टम: नर्मदापुरम में 25 करोड़ का ‘मिट्टी-मूंग’ महाघोटाला; 8 दिन बाद भी ‘मिलावट की तारीख’ तलाश रहे बेबस अफसर!

- नर्मदा गौरव विशेष रिपोर्ट | माखननगर / सेमरी हरचंद
- रिपोर्टर: ग्राउंड ज़ीरो टीम
ना ताला टूटा, ना सील टूटी… फिर 31 हजार क्विंटल मूंग कैसे बन गई मिट्टी?
नर्मदापुरम। क्या बिना चाबी के वेयरहाउस का दरवाजा खुल सकता है? क्या बिना अधिकारियों की रज़ामंदी के 25 करोड़ रुपये के अनाज को मिट्टी में बदला जा सकता है? ‘नर्मदा गौरव’ की पड़ताल में नर्मदापुरम जिले के सरकारी तंत्र और वेयरहाउस माफिया के उस गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगा दी है।
माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस और सेमरी हरचंद स्थित कनक वेयरहाउस में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंग के नाम पर बोरियों में मिट्टी और कचरा भरकर रख दिया गया। हैरानी की बात यह है कि घोटाले का खुलासा हुए पूरे 8 दिन (1 हफ्ता) बीत चुके हैं, लेकिन जांच की कछुआ चाल का आलम यह है कि जिम्मेदार अफसर आज तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि मूंग में मिट्टी मिलाई कब गई और उस वक्त कुर्सी पर कौन सा साहब तैनात था!
🔴 ऐसे खुला 25 करोड़ के खेल का राज
सरकार से मूंग खरीदने आए एक मिलर (व्यापारी) ने जब कनकधारा वेयरहाउस में रखे अनाज के सैंपल लेने के लिए बोरियां टटोलीं, तो उसके होश उड़ गए। मूंग के दानों की जगह हाथों में मिट्टी और कंकर आ रहे थे। व्यापारी ने बिना देरी किए सीधे कलेक्टर सोमेश मिश्रा के पास पहुंचकर शिकायती सबूत पेश किए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने आनन-फानन में एसडीएम (राजस्व) की अगुवाई में एक संयुक्त जांच दल रवाना किया। टीम में कृषि, विपणन, MPWLC और नेफेड (NAFED) के दिग्गजों को शामिल कर 22 जुलाई को जब गोदाम पर धावा बोला गया, तो बोरियों की जांच में अधिकारी खुद सन्न रह गए—कई बोरियां तो ऊपर से नीचे तक सिर्फ मिट्टी और कचरे से भरी हुई थीं!
📊 आंकड़ों में समझिए ‘नर्मदा गौरव’ का बड़ा खुलासा:
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
|---|---|
| कुल भंडारित अनाज | 62,862 बोरियां (लगभग 31,000 क्विंटल) |
| कुल अनुमानित कीमत | ₹ 25 करोड़ (लगभग) |
| वर्ष 2023-24 का अनाज | 29,927 बोरियां (खरीददार: लक्ष्मी स्व-सहायता समूह) |
| वर्ष 2024-25 का अनाज | शेष बोरियां (खरीददार: सेवा सहकारी समिति बहादुरपुर) |
| वर्तमान स्थिति | वेयरहाउस सील, सैंपल लैब भेजे गए |
🔒 चाबी किसके पास थी? घेरे में आए ‘साहब’ और ‘संचालक’
सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस खेल में सबसे बड़ा पेंच ताले को लेकर फंसा है। नियम कहता है कि सरकारी अनाज वाले प्राइवेट वेयरहाउस पर दोहरी सील/चाबी होती है—एक चाबी वेयरहाउस संचालक के पास और दूसरी मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (MPWLC) के ब्रांच मैनेजर के पास।
जांच में साफ हो चुका है कि वेयरहाउस का न तो ताला टूटा है और न ही बदला गया है। यानी साफ है कि वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी मौजूदगी और मिलीभगत से ही रात के अंधेरे में ताले खोलकर असली मूंग पार की गई और उसकी जगह मिट्टी भर दी गई!
🗣️ किसकी क्या है दलील?
“जांच पूरी तत्परता से चल रही है। जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर महोदय को सौंपी जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह वेयरहाउस संचालक हो या सरकारी कर्मचारी, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। आपराधिक मामला (FIR) दर्ज होगा।” — देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम (राजस्व), नर्मदापुरम
💥 ‘नर्मदा गौरव’ के तीखे सवाल:
- तारीख क्यों छुपा रहे अफसर? जब 2023 और 2024 दोनों सालों की मूंग के स्टैक में मिलावट मिली है, तो जांच अधिकारी यह बताने से क्यों कतरा रहे हैं कि यह घोटाला किस अधिकारी के कार्यकाल में परवान चढ़ा?
- क्या छोटी मछलियों पर गिरेगी गाज? क्या हर बार की तरह इस बार भी समिति के कर्मचारियों और चौकीदारों को बलि का बकरा बनाकर MPWLC और विपणन विभाग के बड़े ‘मगरमच्छों’ को बचा लिया जाएगा?
- नमूने पास कैसे हुए? जब अनाज वेयरहाउस में जमा हो रहा था, तब क्वालिटी इंस्पेक्टरों (QI) ने ओके रिपोर्ट कैसे दी? क्या मिट्टी से भरी बोरियों की जांच आंख बंद करके की गई थी?
‘नर्मदा गौरव’ इस मामले पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है। जांच के नाम पर लीपापोती की हर कोशिश को जनता के सामने लाया जाएगा।
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