जनता बूंद-बूंद को तरसी, नपा के साहब ठेकेदार पर बरसे! 5 साल की फाइलों पर एक साथ दस्तखत कर उड़ाए करोड़ों, ढाई करोड़ की पेनल्टी भी ‘गिफ्ट’ की

नर्मदापुरम।क्या आपने कभी सुना है कि बिना काम किए करोड़ों रुपये मिल जाएं और गलती करने पर करोड़ों की पेनल्टी (जुर्माना) भी माफ कर दी जाए? नर्मदापुरम नगरपालिका में ऐसा ही एक सनसनीखेज ‘अमृत पेयजल घोटाला’ सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है, और इधर फाइलों में बंद कमरों के भीतर भ्रष्टाचार का ‘अमृत’ बांटा जा रहा था। पूर्व एल्डरमैन राजेश अत्रे ने कलेक्टर से दस्तावेजी सबूतों के साथ इस पूरे नेक्सस (अफसरों और ठेकेदार कंपनी) का पर्दाफाश किया है।

🔥 घोटाले की 3 सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बातें:

  • 1. 5 साल सोते रहे अफसर, एक साथ पास कर दिए बिल!
    ठेकेदार कंपनी ‘इंडियन ह्यूम पाइप’ (IHP) ने साल 2019 से 2024 तक (5 साल) के मेंटेनेंस के बिल एक साथ साल 2024 में नगरपालिका के सामने रख दिए। नियम कहता है कि जल प्रदाय शाखा को हर महीने मौके पर जाकर ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ (भौतिक सत्यापन) करना था। लेकिन 2019 से 2023 तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या उपयंत्री (Sub Engineer) ने साइट पर जाकर जांच करने की जहमत ही नहीं उठाई। घर बैठे-बैठे 3 करोड़ 65 लाख 33 हजार 175 रुपये का भुगतान कर दिया गया!
  • 2. ढाई करोड़ की पेनल्टी… जेब में डाल ली?
    अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और काम में देरी की वजह से कंसलटेंट कंपनी ‘वेपकॉस’ ने ठेकेदार कंपनी पर 2.50 करोड़ रुपये की लिक्विडेटेड डैमेजेस (पेनल्टी) लगाने की सिफारिश की थी। नियमों के मुताबिक इस पेनल्टी को माफ करने का हक सिर्फ ‘परिषद की सामान्य सभा’ को था। लेकिन मेहरबान अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर, फाइलों के नीचे इस भारी-भरकम जुर्माने को दबा दिया।
  • 3. 24 घंटे पानी का वादा था, मिल रहा सिर्फ 45 मिनट!
    ‘अमृत-1 योजना’ के मूल एग्रीमेंट और DPR के तहत शहर के लोगों को 24 घंटे (24×7) पर्याप्त प्रेशर के साथ शुद्ध पीने का पानी मिलना था। हकीकत यह है कि 24 घंटे तो दूर, लोगों को सुबह-शाम मुश्किल से 45 मिनट से 2 घंटे ही पानी नसीब हो रहा है। न तो घरों में पानी के मीटर लगे और न ही फिल्टर प्लांट पर ‘स्काडा सिस्टम’ (जिससे लीकेज और पानी की सप्लाई पर ऑनलाइन नजर रखी जाती है) का काम पूरा हुआ।

🏛️ अब आगे क्या? लोकायुक्त की चौखट पर पहुंचेगा मामला

इस खुली लूट के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी है। शिकायतकर्ता राजेश अत्रे ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को लेकर लोकायुक्त जाएंगे। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर उपयंत्रियों ने किस आधार पर फर्जी MB (मेजरमेंट बुक) भरकर करोड़ों का भुगतान कर दिया?

अधिकारियों का पल्ला झाड़ने वाला बयान:
इस पूरे मामले पर जब नगरपालिका (नपा) नर्मदापुरम की सीएमओ हेमेश्वरी पटले से बात की गई, तो उनका कहना था— “इस तरह की शिकायत की अब तक कोई जानकारी नहीं है। शिकायत की जानकारी लगने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।”

💬 जनता का सवाल (Viral Hook):

नर्मदापुरम की जनता टैक्स भर रही है ताकि उन्हें शुद्ध पानी मिले, न कि इसलिए कि उनके पैसों से भ्रष्ट तंत्र और ठेकेदारों की जेबें भरी जाएं। बिना काम देखे करोड़ों का पेमेंट करने वाले इन अफसरों पर आखिर कब तक एक्शन होगा?

विशेष रिपोर्ट नर्मदा गौरव न्यूज़ जिला नर्मदा पुरम मध्य प्रदेश

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