डोलरिया पंचायत में ₹15.65 लाख का गबन: जांच में दोष सिद्ध होने के 3 महीने बाद भी न रिकवरी हुई, न भ्रष्ट सरपंच-सचिव पर FIR!

नर्मदापुरम में पंचों का फूटा गुस्सा; बोले- “भ्रष्टाचार दबाने के लिए हमें मैनेज करने की कोशिश की गई, लेकिन आरटीआई के पुख्ता सबूतों ने खोली पोल, अब कार्रवाई से क्यों बच रहा प्रशासन?”
विशेष ब्यूरो, नर्मदापुरम (डोलरिया)। नर्मदापुरम जिले की डोलरिया ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के दुरुपयोग और खुलेआम वित्तीय गबन का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिला पंचायत सीईओ की जांच में सरपंच और सचिव के खिलाफ ₹15 लाख 65 हजार की हेराफेरी की पुष्टि होने के बावजूद, तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन न तो गबन की राशि की रिकवरी हो पाई है और न ही दोषियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। प्रशासनिक सुस्ती के चलते स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
डोलरिया पंचायत के जागरूक पंचों और सदस्यों ने मिलकर पिछले साल 13 अक्टूबर 2025 को जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात कर एक लिखित शिकायत सौंपी थी। इस शिकायत के साथ आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत निकाले गए पुख्ता दस्तावेजी सबूत भी संलग्न किए गए थे।
शिकायत के आधार पर जब जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने मामले की आधिकारिक जांच करवाई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि वर्तमान सरपंच शीला साहू और पंचायत सचिव कैलाश अहिरवार ने मिलकर नियमों को ताक पर रखकर घटिया निर्माण कार्य कराए और सरकारी खजाने से ₹15,65,000 की राशि का नियम विरुद्ध भुगतान कर कथित रूप से गबन कर लिया।गंभीर वित्तीय अपराध: बेटे और स्वयं के खातों में ट्रांसफर किया पैसा
मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है। डोलरिया की पंच संजना निर्भय राजपूत ने बताया कि शिकायतकर्ताओं द्वारा सौंपे गए सबूतों से साफ हुआ है कि दोषियों ने एक संबंधित ठेकेदार कंपनी को फर्जी बिलों का भुगतान तो किया ही, साथ ही सरकारी राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे स्वयं (सरपंच/सचिव) और अपने बेटे के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया।
“मैनेज” करने के सारे प्रस्ताव फेल, पंचों ने दिखाई दृढ़ता
शिकायत के बाद जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो अनावेदकों (सरपंच-सचिव) द्वारा मामले को रफा-दफा करने और फाइलों में ही दफन करने की पुरजोर कोशिश की गई। पंचों का आरोप है कि उन्हें चुप कराने के लिए कई तरह के ‘मैनेजमेंट’ और समझौते के प्रस्ताव दिए गए, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट पंचों ने इन सभी प्रस्तावों को सिरे से ठुकरा दिया और सच्चाई की लड़ाई जारी रखी।
कागजों तक सीमित रही प्रशासनिक चेतावनी!
जांच में दोष सिद्ध होने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने सरपंच और सचिव से तत्काल राशि वसूलने के आदेश जारी किए थे। साथ ही यह कड़ी चेतावनी भी दी थी कि यदि तय समय सीमा में राशि जमा नहीं की गई, तो दोषियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।
परंतु, विडंबना देखिए कि इस आदेश और चेतावनी को जारी हुए 3 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर कार्रवाई शून्य है। इस ढुलमुल रवैये को लेकर जब ‘नर्मदा गौरव न्यूज़’ टीम ने दूरभाष के माध्यम से जिपं सीईओ हिमांशु जैन से संपर्क साधने का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।जनता पूछ रही सवाल: संरक्षण किसका?
अब डोलरिया की जनता और पंच यह सवाल उठा रहे हैं कि जब आरटीआई के दस्तावेजों ने भ्रष्टाचार को आईने की तरह साफ कर दिया है और प्रशासनिक जांच में भी गबन पर मुहर लग चुकी है, तो फिर आखिर किसके दबाव में दोषियों को बचाया जा रहा है? आखिर आर्थिक अपराध के सीधे मामले में एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है?
📰 ख़बर पर एक नज़र:
- कहाँ का मामला: ग्राम पंचायत डोलरिया, जनपद डोलरिया (नर्मदापुरम)
- मुख्य आरोपी: सरपंच शीला साहू एवं सचिव कैलाश अहिरवार
- गबन की कुल राशि: ₹15,65,000 (पंद्रह लाख पैंसठ हजार रुपये)
- जांच अधिकारी: हिमांशु जैन (सीईओ, जिला पंचायत)
- वर्तमान स्थिति: दोष सिद्ध, पर 3 महीने बाद भी एफआईआर और रिकवरी लंबित।
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