एमपी: रसूखदारों के ‘हाई-प्रोफाइल’ बेटों का साइबर गैंग से कनेक्शन, उज्जैन में गोल्ड इनवेस्टमेंट नेटवर्क का भंडाफोड़

उज्जैन/नर्मदापुरम।
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके तार नर्मदापुरम के रसूखदार परिवारों से जुड़े हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए शातिर कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि एमबीए डिग्री धारक और ऊंचे सियासी व व्यापारिक रसूख वाले परिवारों के चिराग हैं। दिल्ली के बड़े साइबर ठगों के इशारे पर फर्जी पहचान के दम पर लाखों की ठगी के पैसे को सोने में खपाने वाले इस हाई-प्रोफाइल गैंग को उज्जैन पुलिस ने दबोच लिया है।

हाईलाइट्स: जो इस केस को बनाती हैं बड़ा

  • मास्टरमाइंड का पॉलिटिकल कनेक्शन: पकड़े गए मुख्य आरोपियों में से एक अनिमेष (अनुराग) वर्मा के पिता अभय वर्मा नर्मदापुरम में भाजपा नेता और नगरपालिका उपाध्यक्ष हैं।
  • पढ़े-लिखे और कारोबारी घरों के लड़के: गिरफ्तार हुए तीनों ही आरोपी एमबीए पास आउट हैं। इनमें कशिश उर्फ गुलमिल बढ़ानी खुद रेडीमेड गारमेंट्स का बिजनेसमैन है और राहुल (शान) गुप्ता के पिता इलाके के बड़े स्टेशनरी थोक व्यापारी हैं।
  • क्रिप्टो और टेलीग्राम से बुना जाल: गिरोह का मुख्य सूत्रधार अनिमेष करीब तीन महीने पहले टेलीग्राम पर ‘सात्विक’ नाम की एक संदिग्ध डिजिटल आईडी के संपर्क में आया था, जहाँ उसे बाइनेंस (Binance) जैसे क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए मोटी कमाई का लालच दिया गया था।

मोडस ऑपेरंडी: कैसे काम करता था यह डिजिटल सिंडिकेट?

जांच में सामने आया है कि दिल्ली के बड़े साइबर ठग देशभर में लोगों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करते थे। उस अवैध पैसे को लीगल करने या ठिकाने लगाने के लिए इन स्थानीय लड़कों को मोहरा बनाया गया था।
ठगों के निर्देश पर इन लड़कों ने फर्जी आधार कार्ड और जाली आईडी तैयार की। चूंकि सोने (गोल्ड) की कमोडिटी वैल्यू कभी कम नहीं होती, इसलिए ठगों ने इन्हें सीधे कैश के बजाय सराफा बाजार और पेट्रोल पंपों पर पैसा निवेश करने का टारगेट दिया था।

उज्जैन के सराफा बाजार में 10 दिन का डेरा, 4 दुकानों से खरीदा सोना

आरोपी युवक करीब 10 दिनों तक उज्जैन में छुपकर रहे और ठगों द्वारा भेजे गए क्यूआर (QR) कोड्स का इस्तेमाल करके अलग-अलग किस्तों में कुल 4 लाख 65 हजार रुपये का सोना ठिकाने लगा दिया:

  • 5 जून: फ्रीगंज स्थित महावीर ज्वैलर्स से 92,000 रुपये का सोना।
  • 6 जून: डीपीके ज्वैलर्स से 92,000 रुपये का सोना।
  • 9 जून: माहेश्वरी ज्वैलर्स से 91,000 रुपये का सोना।
  • 11 जून: डीपी ज्वैलर्स से 1,50,000 रुपये का सोना समेटा।

एक गलती और ‘होल्ड’ खाते ने खोल दी पोल

इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब आरोपियों ने आखिरी बड़ी डील की। ठगों के क्यूआर कोड से जैसे ही ज्वैलर के खाते में पेमेंट ट्रांसफर हुई, वैसे ही साइबर सेल की रडार पर आते ही बैंक ने संबंधित ज्वैलर का खाता फ्रीज (होल्ड) कर दिया। खाता ब्लॉक होते ही सर्राफा व्यापारियों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा और माधवनगर टीआई गजेंद्र पचौरीया की टीम ने तुरंत जाल बिछाया और घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

देशभर के पीड़ित: इन खातों से उड़ाए गए थे पैसे

पुलिस जांच में यह भी साफ हो गया है कि आरोपियों ने जिस पैसे से सोना खरीदा, वह देश के अलग-अलग राज्यों के आम नागरिकों से ठगा गया था:

  1. राजस्थान (नागौर): मोहम्मद नासिर के खाते से उड़ाए गए ₹2.88 लाख।
  2. पंजाब: सुरिंदर सिंह के खाते से साफ किए गए ₹95 हजार।
  3. गाजियाबाद: मनोज कुमार के खाते से सेंध लगाकर निकाले गए ₹99 हजार।
    बड़ा सवाल: अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि दिल्ली में बैठा वह ‘सात्विक’ कौन है और इस सिंडिकेट में मध्य प्रदेश के और कितने रसूखदार चेहरे शामिल हैं?
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