डीजल का महासंकट: खेतों में थमे हार्वेस्टर के पहिए, बर्बादी के डर से कांप रहा अन्नदाता

पंपों पर घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौट रहे किसान; कटाई सीजन में ईंधन की किल्लत ने उड़ाई नींद।
नर्मदापुरम/इटारसी:
खेतों में सुनहरी फसल पककर तैयार खड़ी है, लेकिन उसे सहेजने वाला किसान आज बेबसी के आंसू रो रहा है। कृषि के सबसे महत्वपूर्ण ‘पीक सीजन’ (कटाई के समय) में अचानक पैदा हुए डीजल संकट ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। इटारसी-नर्मदापुरम मार्ग पर पेट्रोल पंप के सामने केन और कुप्पियां रखकर चक्काजाम करने वाले किसानों की आंखों में सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि अपनी सालभर की मेहनत के बर्बाद हो जाने का गहरा भय भी छिपा है।
🌾 फसलों की कटाई ठप: प्रकृति और बर्बादी का डर
किसानों के इस आंदोलन और डर के पीछे की वजहें बेहद गंभीर हैं:
- मौसम की अनिश्चितता का भय: फसलों की कटाई का एक निश्चित समय होता है। यदि समय पर कटाई न हुई और इस बीच मौसम बिगड़ गया या बेमौसम बारिश हो गई, तो पूरी फसल खेतों में ही सड़ जाएगी। डीजल न मिलने से हार्वेस्टर और ट्रैक्टर बंद पड़े हैं, जिससे यह डर अब हकीकत बनता दिख रहा है।
- कर्ज और आर्थिक तबाही का साया: किसान सालभर खाद, बीज और कीटनाशकों के लिए कर्ज लेता है। इस उम्मीद में कि फसल बेचकर कर्ज चुकाएगा। डीजल संकट के कारण यदि फसल समय पर बाजार नहीं पहुंची, तो किसान गहरे कर्ज के दलदल में धंस जाएगा।
- नियमों की अव्यावहारिक मार: पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा केन और कुप्पियों में डीजल देने से मना करने के कारण संकट और विकराल हो गया है। किसानों का कहना है कि हर बार विशालकाय हार्वेस्टर मशीनों को डीजल भरवाने पेट्रोल पंप तक लाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
📉 तेल डिपो की विफलता: 6 दिनों का लंबा इंतजार क्यों?
इस संकट को सबसे ज्यादा पेट्रोल पंप संचालकों के बयानों ने डरावना बना दिया है। उनका दावा है कि तेल डिपो से पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही है और नई खेप आने में 5 से 6 दिन का समय लग रहा है।
सोचने वाली बात: खेती के सीजन में जहां एक-एक घंटा कीमती होता है, वहां 6 दिन तक ईंधन की आपूर्ति ठप रहना पूरी प्रशासनिक और वितरण व्यवस्था (Supply Chain) के फेल होने का प्रमाण है।
🛑 आक्रोश के पीछे का सच: “प्रशासन जागे, वरना आंदोलन उग्र होगा”
शनिवार को हुए भारी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों को शांत तो करा दिया है, लेकिन किसानों का भय दूर नहीं हुआ है। किसानों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कृषि कार्यों के लिए डीजल की आपातकालीन व्यवस्था नहीं की गई, तो यह आक्रोश एक बड़े और उग्र आंदोलन में बदल जाएगा।
हमारा नजरिया:
यह संकट सिर्फ इटारसी या नर्मदापुरम का नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) से जुड़ा मसला है। सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर प्राथमिकता के आधार पर डीजल की सप्लाई बहाल करनी चाहिए, ताकि देश के अन्नदाता को इस भयानक डर से निकाला जा सके।
नर्मदा गौरव न्यूज़ मध्य प्रदेश किसानों की आवाज हमारी पहचान
नर्मदापुरम ब्रेकिंग: फर्जी FB आईडी से महिला को अश्लील मैसेज भेजने वाला नपा का पूर्व अतिक्रमण प्रभारी सुनील राजपूत पहुंचा जेल!
https://narmadagauravnews.in/pathroda-itarsi -ganjagan/
https://narmadagauravnews.in/nagar-palika -adhyaksh-ghar-ke-samne-dera/
https://narmadagauravnews.in/saurabh-pandey -itarsi-thana-prabhari/
डोलरिया क्षेत्र में ‘नारी शक्ति’ का चंडी रूप! अवैध शराब से भरी लग्जरी गाड़ी को महिलाओं ने घेरा; दुम दबाकर खेतों में भागे तस्कर
नर्मदा गौरव न्यूज़ विशेष: जनजातीय कार्य विभाग में नियमों की धज्जियां, होटलों में गुप्त बैठकें और चपरासी बना कार ड्राइवर!
https://narmadagauravnews.in/yuvti-ke-sath-kiya -gaya-hai-dushkarm/
