: इटारसी में चुनावी रणभेरी: एक तरफ चुनाव आयोग का औचक निरीक्षण, दूसरी तरफ भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों ने झोंकी ताकत, सरगर्मियां तेज!

सब-हेडलाइन: राज्य चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक ने परखीं व्यवस्थाएं, वहीं वार्डों में दोनों प्रमुख दलों के नेताओं ने शुरू की घेराबंदी; मतदाता सूची पर टिका सबका दारोमदार।
इटारसी/नर्मदापुरम। आगामी स्थानीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान भले ही अभी बाकी हो, लेकिन इटारसी का सियासी पारा पूरी तरह गरमा चुका है। एक तरफ जहां प्रशासनिक अमला चुनाव को निष्पक्ष कराने के लिए जमीन पर उतर आया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी गोटियां बिछाना और चुनावी तैयारियां सक्रिय रूप से शुरू कर दी हैं।
प्रशासनिक कसौटी: पर्यवेक्षक की पैनी नजर
शनिवार को इटारसी तहसील में उस समय प्रशासनिक हड़कंप मच गया जब मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक निसार अहमद निसार औचक निरीक्षण पर पहुंचे। उनके साथ एसडीएम नीलेश कुमार शर्मा और तहसीलदार सुनीता साहनी भी मौजूद थीं।
टीम ने पुरानी इटारसी के वार्ड क्रमांक 4 और वार्ड क्रमांक 30 सहित कई मतदान केंद्रों का बारीकी से निरीक्षण किया। पर्यवेक्षक ने साफ किया कि मतदाता सूची में कोई भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि:
- मृत मतदाताओं के नाम तुरंत हटाए जाएं।
- बाहरी शहरों से आए नए नागरिकों और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा वोटर्स के नाम प्राथमिकता से जोड़े जाएं।
राजनैतिक हलचल: दोनों दलों के दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
प्रशासनिक सख्ती के बीच, शहर की गलियों और वार्डों में राजनैतिक दलों की सक्रियता भी चरम पर पहुंच गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के स्थानीय नेता और टिकट के दावेदार सक्रिय रूप से मैदान में कूद चुके हैं। * वोट बैंक मजबूत करने की होड़: दोनों ही दलों के नेता इस समय प्रशासनिक गाइडलाइन के तहत अपने-अपने वार्डों में एक्टिव हैं। वे यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि उनके समर्थक मतदाताओं (विशेषकर नए युवाओं) के नाम मतदाता सूची में जुड़ जाएं और विरोधी खेमे के फर्जी या ट्रांसफर हो चुके वोटर्स के नाम कट सकें।
- वार्डों में बैठकों का दौर: इटारसी के नगरीय क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में दोनों दलों द्वारा गुप्त रणनीतिक बैठकें और कार्यकर्ताओं की टोह लेने का काम शुरू हो चुका है। टिकट की दावेदारी करने वाले नेता अभी से जनता के बीच अपनी हाजिरी लगाने लगे हैं।
निष्पक्षता और साख की लड़ाई
पर्यवेक्षक निसार अहमद ने कहा कि आयोग का उद्देश्य हर हाल में चुनाव को पारदर्शी बनाना है। लेकिन जमीन पर स्थिति यह है कि इस बार का स्थानीय चुनाव दोनों ही दलों के लिए साख का सवाल बन चुका है, जिसके कारण वार्ड स्तर पर शह-मात का खेल अभी से दिखाई देने लगा है। प्रशासन की इस कड़ाई और नेताओं की इस मुस्तैदी ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनाव बेहद दिलचस्प और कड़ा होने वाला है।
नर्मदा गौरव न्यूज़ जिला नर्मदापुरम मध्य प्रदेश
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