42 डिग्री में तपते रहे आदिवासी… पुलिस ने देखी छांव की शरण, रात 11 बजे तक अपनी मांगों पर अड़े रहे आंदोलनकारी!

नर्मदापुरम। वन विभाग के कथित अत्याचारों और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली के खिलाफ जिला मुख्यालय पर आदिवासी समाज का एक बड़ा और ऐतिहासिक आक्रोश देखने को मिला है। ‘हमारा गांव संगठन, मप्र’ के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में आए ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट गेट का घेराव कर जबरदस्त प्रदर्शन किया।
गौरतलब है कि केसला ब्लॉक के आदिवासियों के साथ वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा की गई कथित प्रताड़ना और अमानवीय व्यवहार के मामले को ‘नर्मदा गौरव न्यूज़’ ने पूर्व में भी पूरी निष्पक्षता के साथ उजागर किया था। पूर्व में दिए गए ज्ञापनों और चेतावनियों पर प्रशासन द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने के कारण यह असंतोष गहराता गया, जिसका नतीजा मंगलवार को कलेक्ट्रेट के महा-घेराव के रूप में सामने आया।

भीषण गर्मी में संघर्ष: एक तरफ ज़िद, दूसरी तरफ छांव की तलाश

मंगलवार को क्षेत्र में पारा 42 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया था। झुलसा देने वाली इस धूप के बावजूद आदिवासी समाज के लोग कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर, बिना किसी छांव के, सड़क पर डटे रहे।
इस दौरान मौके पर कानून-व्यवस्था संभालने पहुंचे सुरक्षा बल का एक अलग ही चेहरा देखने को मिला। चिलचिलाती धूप में जहां प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार नारेबाजी कर रहे थे, वहीं सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी शुरुआती औपचारिकताओं और फोटो खिंचवाने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में पेड़ों की ठंडी छांव और ओट तलाशते नजर आए। इसके विपरीत, प्रदर्शनकारी रात 11 बजे तक बिना डिगे अपनी जगह पर बैठे रहे।

मुख्यमंत्री को भेजा 11 सूत्रीय ज्ञापन; ‘थर्ड डिग्री’ के गंभीर आरोप

आंदोलनकारियों ने इस बार सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक विस्तृत 11 सूत्रीय आधिकारिक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा है। ‘नर्मदा गौरव’ के पास मौजूद इस ज्ञापन की प्रतियों के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों, विशेषकर बनापुरा परिक्षेत्र के फॉरेस्ट SDO अनिल विश्वकर्मा और उनके मातहत कर्मचारियों पर रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए गए हैं:

  • 3 दिन तक अवैध बंधक और मारपीट: ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि केसला ब्लॉक के आदिवासियों को तीन दिनों तक अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
  • जातिसूचक गालियां और करंट: ग्रामीणों का आरोप है कि प्रताड़ना के दौरान उन्हें जातिसूचक शब्द कहे गए और बिजली के करंट (इलेक्ट्रिक शॉक) तक लगाए गए, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।
  • फर्जी मुकदमे और बेदखली: वनग्राम के वैध पट्टाधारी गरीब किसानों को डराने और उनकी जमीनों पर कब्जा करने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा बिना किसी सबूत या गवाह के झूठे और फर्जी केस दर्ज किए जा रहे हैं।

9 घंटे तक चला गतिरोध; शीर्ष अधिकारियों को बुलाने पर अड़े रहे नेता

दोपहर 2:00 बजे से शुरू हुआ यह प्रदर्शन रात 11:00 बजे तक (लगभग 9 घंटे) लगातार जारी रहा। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए एडीएम अनिल जैन, सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा और तहसीलदार सरिता मालवीय सहित भारी प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा।

निचले स्तर की वार्ताओं को नकारा
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ पदाधिकारी फागराम भास्कर और दुर्गेश धुर्वे ने प्रशासनिक अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि पूर्व में स्थानीय और निचले स्तर के अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन उन पर कोई धरातलीय कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए, वे अपनी शिकायतों का पुलिंदा सीधे कलेक्टर और डीएफओ (DFO) की मौजूदगी में ही सौंपेंगे। काफी लंबे गतिरोध और मान-मनौव्वल के बाद देर रात मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तगत कराया जा सका।

‘नर्मदा गौरव’ का निष्पक्ष दृष्टिकोण

एक जिम्मेदार और निष्पक्ष मीडिया माध्यम होने के नाते, ‘नर्मदा गौरव न्यूज़’ हमेशा पीड़ित और शोषित वर्ग की आवाज को बिना किसी पक्षपात के सामने लाता रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि यदि पूर्व में हमारी खबरों और ज्ञापनों पर प्रशासन ने समय रहते विभागीय जांच या उचित कार्रवाई की होती, तो आदिवासियों को इस भीषण गर्मी में 9 घंटे तक सड़क पर बैठने को मजबूर नहीं होना पड़ता।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए इस 11 सूत्रीय ज्ञापन में दोषी वन अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने, उन्हें सेवा से बर्खास्त करने और आदिवासियों पर दर्ज झूठे प्रकरण वापस लेने की मांग की गई है। अब देखना यह होगा कि शासन इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। ‘नर्मदा गौरव न्यूज़’ इस संवेदनशील मामले के हर घटनाक्रम पर अपनी पैनी नज़र बनाए रखेगा।
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नर्मदा गौरव न्यूज़ मध्य प्रदेश

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