राजनीति नहीं, जनसेवा का संकल्प: छात्र राजनीति से ‘वार्ड-वार्ड चलो’ अभियान तक मयूर जायसवाल का दो दशकों का सफर

इटारसी। शहर की राजनीति में जब भी सक्रिय नेतृत्व, जमीनी पकड़ और संघर्षशील व्यक्तित्व की बात होती है, तो एक नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आता है— मयूर जायसवाल। पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष और वर्तमान में कांग्रेस के एक सशक्त स्तंभ के रूप में मयूर जायसवाल ने न केवल अपनी एक अलग पहचान बनाई है, बल्कि इटारसी के जनमानस में अपना विश्वास भी गहरा किया है।

■ छात्र राजनीति की तपिश से निखरा नेतृत्व
मयूर जायसवाल के नेतृत्व की नींव छात्र राजनीति के दौर में ही पड़ गई थी। कॉलेज के गलियारों से शुरू हुआ संघर्ष आज शहर की गलियों तक पहुँच चुका है। छात्र हितों की लड़ाई लड़ते हुए उन्होंने संगठन की बारीकियों को समझा और यही कारण है कि आज उनकी कार्यशैली में वह परिपक्वता और जुझारूपन नजर आता है, जो एक जननेता की पहली पहचान होती है।

20 वर्षों का अनवरत संघर्ष और इतिहास
राजनीति में टिके रहना बड़ी बात है, लेकिन सक्रियता के साथ टिके रहना और भी बड़ी उपलब्धि है। पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से मयूर जायसवाल इटारसी की राजनीति में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने सत्ता और विपक्ष, दोनों ही परिस्थितियों में जनता की आवाज को दबने नहीं दिया। नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के उत्साह के लिए जाना जाता है।

■ सेवा का संस्कार: विरासत में मिली समाज सेवा
मयूर जायसवाल की सक्रियता के पीछे उनका पारिवारिक बैकग्राउंड एक बड़ी ताकत है। उनका परिवार पीढ़ियों से समाज सेवा के क्षेत्र में तत्पर रहा है। राजनीति उनके लिए पद पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा की उस विरासत को आगे बढ़ाने का एक मंच है, जो उन्हें उनके पूर्वजों से मिली है। यही कारण है कि संकट के समय शहर का कोई भी व्यक्ति निसंकोच उनके पास पहुँच जाता है।

■ वार्ड-वार्ड चलो’ अभियान: युवा कांग्रेस के साथ नया शंखनाद
वर्तमान में मयूर जायसवाल युवा कांग्रेस के तत्वाधान में ‘वार्ड-वार्ड चलो’ अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे शहर के प्रत्येक वार्ड में पहुँचकर जनता की समस्याओं को सुन रहे हैं और सरकार की विफलताओं को उजागर कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में युवाओं का जो हुजूम उमड़ रहा है, वह बताता है कि आने वाले समय में इटारसी की राजनीति में उनकी भूमिका और भी निर्णायक होने वाली है।

■ कार्यशैली जो बनाती है उन्हें खास
▪︎ सुलभता: शहर का कोई भी आम नागरिक उनसे आसानी से मिल सकता है।
▪︎ स्पष्टवादिता: मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखना उनकी पहचान है।
▪︎ संगठन क्षमता: पुराने दिग्गजों और नए युवाओं के बीच सेतु का कार्य करना।
निष्कर्ष:मयूर जायसवाल का अब तक का सफर यह सिद्ध करता है कि एक सच्चा नेता वही है जो समय की कसौटी पर खरा उतरे। 20 साल का राजनीतिक अनुभव, छात्र राजनीति का जोश और सेवा का पारिवारिक संस्कार— इन तीनों के संगम ने मयूर जायसवाल को इटारसी का एक ऐसा चेहरा बना दिया है, जिसकी चमक आज हर वार्ड में महसूस की जा रही है।
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