80 लाखों खर्च, फिर भी अंधेरे में नर्मदापुरम: बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों से

नर्मदापुरम। शहर में बेहतर रोशनी और सुरक्षित आवागमन के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन आज वही व्यवस्था सवालों के घेरे में है। हाउसिंग बोर्ड चौराहे से पहाड़िया रोड होते हुए रेलवे फाटक तक कुछ वर्ष पहले करीब 80 लाख रुपए की लागत से बिजली के खंभे और एलईडी लाइटें लगाई गई थीं। उद्देश्य था कि रात के समय यह मार्ग रोशन रहे और लोगों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।

लेकिन वर्तमान स्थिति इसके ठीक उलट नजर आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग पर लगे लगभग 80 प्रतिशत बल्ब बंद पड़े हैं, जिसके चलते कई हिस्सों में रात के समय घना अंधेरा छा जाता है। अंधेरे के कारण पैदल राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।

सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी राशि सार्वजनिक धन से खर्च की गई थी, तो इन लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है? यदि अधिकांश लाइटें लंबे समय से बंद हैं, तो नगरपालिका प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

नगरपालिका अध्यक्ष और स्थानीय प्रशासन से सीधा सवाल है—आखिर बंद पड़ी इन लाइटों को अब तक दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया? जनता के टैक्स से खर्च की गई राशि का उद्देश्य केवल खंभे और लाइटें लगाना नहीं, बल्कि उनका नियमित संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करना भी है।

रात के अंधेरे में इस मार्ग से गुजरने वाले नागरिक किसी हादसे का शिकार न हों, इसके लिए तत्काल सभी खराब स्ट्रीट लाइटों की जांच और मरम्मत कराई जाना जरूरी है। नागरिकों की मांग है कि नगरपालिका इस मामले में जवाबदेही तय करे, बंद लाइटों को जल्द चालू कराए और भविष्य में नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

विशेष रिपोर्ट नर्मदा गौरव न्यूज़ मध्य प्रदेश

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