इटारसी नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल: कचरा कलेक्शन शुल्क में 150% की वृद्धि और ‘दोगुने’ संपत्ति कर का खौफ, जनता असमंजस में!

इटारसी। शहर की स्वच्छता व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के निर्णय के साथ ही इटारसी नगरपालिका एक बार फिर विवादों और संशयों के घेरे में है। कचरा कलेक्शन शुल्क (User Charges) और संपत्ति कर को लेकर जारी विरोधाभासी खबरों ने आम नागरिक को मानसिक और आर्थिक तनाव में डाल दिया है।
एक शहर, दो खबरें: ₹600 या ₹1500?
नगरपालिका द्वारा शहर के एक बड़े हिस्से का कचरा संग्रहण कार्य निजी एजेंसी को दिया गया है। लेकिन शुल्क को लेकर स्थिति ‘अंधेरे में तीर’ चलाने जैसी है।
- पहला पक्ष: स्वच्छता प्रभारी के बयानों के हवाले से खबर है कि अब हर संपत्ति पर ₹125 प्रतिमाह (यानी ₹1500 वार्षिक) शुल्क वसूला जाएगा। भुगतान न करने पर भारी अधिभार (Surcharge) की चेतावनी भी दी जा रही है।
- दूसरा पक्ष: अन्य खबरों के अनुसार, जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा और पुराने ₹600 वार्षिक की दर ही प्रभावी रहेगी।
बड़ा सवाल: जब तक परिषद से विधिवत स्वीकृति नहीं ली गई, तब तक ₹600 के शुल्क को सीधे ₹1500 करना किस नियम के तहत वैध है? क्या यह ‘मेरी मर्जी’ का प्रशासन है?
एजेंसी की ‘मैपिंग’ पर उठे सवाल
शहर में निजी ठेकेदार द्वारा ‘मैपिंग’ के नाम पर संपत्तियों की गिनती शुरू कर दी गई है। नागरिकों का पूछना है कि जब नगरपालिका के पास पहले से ही संपत्ति कर का पूरा डेटा मौजूद है, तो इस नए सर्वे का औचित्य क्या है? क्या यह एजेंसी अब संपत्ति कर के निर्धारण का भी अधिकार रखती है?
जमीनी हकीकत: वही ढाक के तीन पात
निजीकरण के बाद भी धरातल पर कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि:
- वही पुरानी कचरा गाड़ियां और पुराने अनाउंसमेंट।
- गाड़ियों की वही अनियंत्रित स्पीड।
- गाड़ियों से स्टाफ कम हो गया है, अब ड्राइवर के साथ दूसरा कर्मचारी भी नदारद है।
संपत्ति कर का ‘चाबुक’: दोगुने कर का डर
संपत्ति कर को लेकर भी प्रशासन का रवैया दमनकारी नजर आ रहा है। राजपत्र का हवाला देकर चालू वर्ष का कर जमा न होने पर सीधे ‘दोगुना कर’ (स्व-अधिभोग की 50% छूट खत्म करना) वसूला जा रहा है।
जनता की मांग: यह नियम वर्तमान वित्तीय वर्ष 2027-28 से लागू होना चाहिए। पुराने बकायेदारों को एक अवसर मिलना चाहिए कि वे अपना कर जमा कर सकें, अन्यथा बिना पूर्व सूचना के दोगुना कर वसूलना सरासर अन्याय है।
लोकायुक्त और EOW की चेतावनी
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि नगरपालिका प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों ने इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो मामले को लोकायुक्त और EOW तक ले जाया जाएगा। 2 रुपये स्क्वायर फीट किराया बढ़ने पर शोर मचाने वाली संस्थाओं की चुप्पी भी इस मामले में संदिग्ध नजर आ रही है।
नर्मदा गौरव न्यूज़ की अपील: प्रशासन अविलंब इस नई व्यवस्था को तब तक स्थगित रखे जब तक कि ठेकेदार अपनी आधारभूत तैयारी (स्वयं के वाहन, स्पष्ट शुल्क ढांचा) पूरी न कर ले और अनुबंध की शर्तें सार्वजनिक न कर दी जाएं।
सोशल मीडिया कैप्शन (Short):
इटारसी नगरपालिका में कचरा कलेक्शन के नाम पर वसूली का नया खेल? ₹600 का शुल्क सीधे ₹1500 करने की तैयारी! ‘मैपिंग’ के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप। क्या सो रहा है प्रशासन? पूरी रिपोर्ट देखें नर्मदा गौरव न्यूज़ पर।
रिपोर्ट:नर्मदा पुरम न्यूज़ मध्य प्रदेश
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