”नर्मदापुरम में सियासी भूकंप: नपाध्यक्ष पंकज चौरे की कुर्सी पर मंडराया संकट, हाईकोर्ट के नोटिस से मचा हड़कंप!”

इटारसी। शहर की सरकार के मुखिया पंकज चौरे के लिए आने वाले दिन मुश्किलों भरे साबित हो सकते हैं। माननीय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार, नगरीय प्रशासन विभाग और स्थानीय प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस खबर के बाद से ही शहर के राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, नपाध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया और वैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। प्रशासन को अब एक निश्चित समय सीमा में यह जवाब देना होगा कि इस मामले में वैधानिक स्थिति क्या है।
कुर्सी पर ‘संकट’ के बादल:
यह केवल एक नोटिस नहीं है, बल्कि पंकज चौरे के राजनैतिक भविष्य के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। यदि प्रशासन के जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं होता है, तो नगर पालिका की सत्ता में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। विपक्ष इस मौके को भुनाने में जुट गया है, वहीं सत्ता पक्ष में सन्नाटा पसरा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर भविष्य पर तलवार लटकी है, वहीं महोदय अभी भी उद्घाटन कार्यक्रमों और रिबन काटने में व्यस्त नजर आ रहे हैं। पंकज चौरे की इस बेपरवाही को लेकर अब विपक्ष पूरी तरह हमलावर हो गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब कुर्सी ही वैधानिक संकट में है, तो नैतिकता के नाते उन्हें जन-प्रतिनिधि के तौर पर आत्ममंथन करना चाहिए, न कि उत्सवों में मग्न रहना चाहिए
प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज़ है कि हाईकोर्ट का यह नोटिस सत्ता के समीकरण बदल सकता है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस ‘झटके’ के बाद प्रशासन क्या जवाब पेश करता है।
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