अंबेडकर जयंती पर कैदियों की रिहाई के आदेश पर विवाद; अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने बताया असंवैधानिक
नर्मदा गौरव न्यूज़

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अंबेडकर जयंती के अवसर पर कैदियों को रिहा करने के आदेश पर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया है।
वोट बैंक की राजनीति का आरोप
अधिवक्ता अनिल मिश्रा का तर्क है कि चंद वोटों की खातिर इस तरह के सामूहिक रिहाई के आदेश कानून की गरिमा को कम करते हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर केवल राजनीतिक लाभ के लिए अपराधियों को छोड़ना समाज के लिए एक गलत संदेश है।
प्रमुख बिंदु:
■संवैधानिक मर्यादा: मिश्रा के अनुसार, सजा माफी की एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसका पालन किया जाना अनिवार्य है।
■न्याय प्रणाली पर प्रभाव: इस तरह के फैसलों से न्यायपालिका द्वारा दी गई सजा का प्रभाव कम होता है
■राजनीतिक मंशा: इसे आगामी चुनावों या वोट बैंक को साधने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है
संविधान दिवस या महापुरुषों की जयंती के नाम पर कैदियों की रिहाई का राजनीतिकरण करना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।”— अनिल मिश्रा, अधिवक्ता
इस मामले में अब विपक्षी दलों और कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। देखना यह होगा कि सरकार इस आलोचना पर क्या स्पष्टीकरण देती है।
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