​नर्मदापुरम महा-घोटाला: कागजों पर हुई गेहूं की ‘पैदावार’, गोदाम से 1841 बोरियां गायब; 6 के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी

नर्मदापुरम/इटारसी: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सरकारी गेहूं खरीदी में एक ऐसा ‘जादुई’ घोटाला सामने आया है, जहां गेहूं असलियत में कभी गोदाम पहुंचा ही नहीं, लेकिन कागजों में उसे सुरक्षित दिखा दिया गया। इटारसी के कोठरा गांव स्थित पंचमुखी वेयरहाउस में हुए इस फर्जीवाड़े ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

​1. जांच में खुला राज: जो खरीदा ही नहीं, उसका स्टॉक दिखा दिया

सिवनी मालवा एसडीएम विजय राय जब आगामी खरीदी की तैयारियों का जायजा लेने पंचमुखी वेयरहाउस पहुंचे, तो सच्चाई देखकर दंग रह गए। भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान स्टॉक रजिस्टर और असल गेहूं की बोरियों में भारी अंतर मिला। जांच में सामने आया कि 1841 बोरी (करीब 920 क्विंटल) गेहूं गायब है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह गेहूं कभी खरीदा ही नहीं गया था, सिर्फ कागजों में स्टॉक बढ़ाकर फर्जी एंट्री की गई थी।

​2. 25 लाख रुपये की चपत, फिर भी FIR में देरी क्यों?

शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस घोटाले की कीमत लगभग 25 लाख रुपये आंकी गई है। घोटाले की पुष्टि होने के बाद एसडीएम ने तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन अब तक एफआईआर दर्ज करवाने में ढुलमुल रवैया अपना रहा है। एसडीएम ने इस पर नाराजगी जताते हुए एमडी (MD) को दोबारा पत्र लिखा है।

3. ये 6 लोग पाए गए दोषी: सूची मुख्यालय भेजी गई

कॉर्पोरेशन की टीम ने विस्तृत जांच के बाद 6 लोगों को इस गबन का मुख्य आरोपी माना है। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है:

​1 शिवराज राजपूत (तत्कालीन शाखा प्रबंधक)

​2 उर्मिला बाई रघुवंशी (वेयरहाउस संचालिका)

3 रणधीर सिंह रघुवंशी (संचालिका के पति)

4​ सचिन अग्रवाल (किरायेदार)

5 बलीराम कटारे (चौकीदार)

6गोविंद कटारे (चौकीदार का बेटा)

​4. वेयरहाउस 1 साल के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’​घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पंचमुखी वेयरहाउस को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जांच में री-स्टैकिंग (बोरियों को दोबारा जमाना) में भारी गड़बड़ी, स्टॉक सत्यापन में घोर लापरवाही और सरकारी नियमों के खुले उल्लंघन के पुख्ता सबूत मिले हैं।

5. रसूख और रेंट एग्रीमेंट का खेल​जांच में यह भी पता चला है कि वेयरहाउस संचालक के प्रतिनिधि ने गोदाम को 11 महीने के एग्रीमेंट पर किसी और को किराये पर दे दिया था। इसी दौरान सरकारी गेहूं की खरीदी और रखरखाव के नाम पर यह पूरा खेल खेला गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल इन 6 लोगों पर कार्रवाई होगी या इस सिंडिकेट में शामिल बड़े चेहरों तक भी जांच की आंच पहुंचेगी?

बड़ी बात: एसडीएम विजय राय ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन एफआईआर में हो रही देरी पूरे सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है

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