एमपी भाजयुमो में ‘एक व्यक्ति, तीन पद’ का घमासान: क्या संगठन में हाशिए पर हैं निष्ठावान कार्यकर्ता?

नर्मदापुरम/भोपाल:
मध्य प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा होते ही प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। संगठन के भीतर ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत की दुहाई देने वाली भाजपा अब अपने ही युवा संगठन की नई लिस्ट के कारण अपनों के ही निशाने पर है।
अभिषेक तिवारी: विवाद के केंद्र में ‘तीन पद’
नई लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा रीवा संभाग से आने वाले अभिषेक तिवारी की हो रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि क्या संगठन के पास कार्यकर्ताओं का अकाल पड़ गया है? अभिषेक तिवारी वर्तमान में तीन महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं:
1प्रदेश मंत्री, भाजयुमो (नई जिम्मेदारी
2जनपद उपाध्यक्ष, त्योंथर (संवैधानिक पद)
3सांसद प्रतिनिधि, रीवा (राजनीतिक प्रभाव का पद)
जमीनी कार्यकर्ताओं में बढ़ता असंतोष
इस नियुक्ति ने उन कार्यकर्ताओं को मायूस कर दिया है जो सालों से झंडा उठा रहे हैं और जिन्हें उम्मीद थी कि इस बार नई टीम में उन्हें जगह मिलेगी। ग्वालियर से लेकर नर्मदापुरम तक, युवा नेताओं के बीच दबी जुबान में यह चर्चा तेज है कि अगर कुछ ही चेहरों के पास शक्ति केंद्रित रहेगी, तो आम कार्यकर्ता कब आगे बढ़ेगा?
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
लिस्ट आने के बाद से ही फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। कई पोस्ट में सीधे तौर पर ‘गुटबाजी’ और ‘भाई-भतीजावाद’ के आरोप लगाए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक तरफ पार्टी युवाओं को मौका देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पहले से पदस्थ लोगों को ही दोबारा नवाजा जा रहा है।
नर्मदा गौरव न्यूज़ का विश्लेषण
एमपी भाजपा के लिए यह स्थिति चुनौती भरी हो सकती है। आने वाले समय में अगर इस नाराजगी को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो संगठन के भीतर गुटबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सवाल यह भी उठता है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इस पर पुनर्विचार करेगा या यह ‘थ्री-इन-वन’ फॉर्मूला ही आगे जारी रहेगा?

