रजिस्ट्री की चौहद्दी बदल हड़पना चाहते थे करोड़ों की सरकारी व निजी कीमती जमीन, कोर्ट ने कांग्रेस नेता के पुत्र को भेजा जेल

विशेष रिपोर्ट: नर्मदा गौरव न्यूज़
इटारसी:
जमीन के सरकारी दस्तावेजों और मूल रजिस्ट्री में हेराफेरी कर अवैध साम्राज्य खड़ा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ माननीय न्यायालय ने एक ऐतिहासिक नजीर पेश की है। इटारसी के तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदित्य रावत की अदालत ने एक बेहद हाई-प्रोफाइल मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी बृजेश उर्फ शरद बामने (उम्र 42 वर्ष, निवासी इंद्रपुरा, पुरानी इटारसी) को 3 साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। उल्लेखनीय है कि सजा का हकदार बना आरोपी बृजेश, जिला कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रमेश बामने का पुत्र है|

क्या था पूरा खेल? (दस्तावेजों में ऐसे हुई थी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’)

यह पूरा मामला साल 2011 से शुरू होता है। इटारसी तहसील कार्यालय के पंजीयक (रजिस्ट्रार) दफ्तर में 18 नवंबर 2011 को भूमिस्वामी नीरज पटेल द्वारा खसरा नंबर 484/2 की जमीन में से 0.796 हेक्टेयर रकबा बेचा गया था।
किस तरीके से दिया गया जालसाजी को अंजाम:

  • मूल सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़: आरोपी बृजेश बामने ने रजिस्ट्री होने के बाद बेहद शातिर तरीके से उप-पंजीयक कार्यालय के रिकॉर्ड या मूल रजिस्ट्री के पन्नों में हेरफेर किया।
  • चतुर्सीमा (Boundaries) का घेराव बदला: आरोपी ने जमीन की मूल रजिस्ट्री में दर्ज ‘चतुर्सीमा’ (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम की सीमाएं) को ही बदल दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कागजों पर जमीन का रुख किसी दूसरी कीमती या सरकारी जमीन की तरफ दिखाया जा सके।
  • अवैध नामांतरण की कोशिश: इस फर्जीवाड़े और कपटपूर्वक तैयार किए गए कूट रचित दस्तावेज के सहारे आरोपी ने संबंधित विभाग में जमीन का नामांतरण (Mutation) अपने नाम कराने के लिए दावा ठोक दिया।

कैसे खुला जालसाजी का यह बड़ा राज?

जब आरोपी ने फर्जी चौहद्दी वाली रजिस्ट्री के आधार पर जमीन पर अपना दावा पेश किया, तो मामला स्क्रूटनी (बारीक जांच) के दायरे में आ गया।

  1. राजस्व अधिकारियों की जांच: जब राजस्व विभाग ने मौके का मिलान और रिकॉर्ड की पड़ताल की, तो पाया कि मूल रजिस्ट्री और आरोपी द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में भारी अंतर है। साफ हो गया कि रजिस्ट्री के असल मजमून से छेड़छाड़ की गई है।
  2. प्रशासनिक हंटर: मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) इटारसी ने तत्काल संज्ञान लिया और उनके कड़े निर्देश पर थाना इटारसी में आरोपी के खिलाफ जालसाजी की एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई।
  3. दोतरफा कानूनी शिकंजा: एक तरफ पुलिसिया कार्रवाई चल रही थी, तो दूसरी तरफ इस पूरे मामले में एक परिवाद (प्राइवेट कम्पलेंट) स्वर्गीय पंकज गोयल द्वारा भी न्यायालय में दायर किया गया था।

न्यायालय में कैसे पस्त हुआ आरोपी का पक्ष?

सरकारी अभियोजन (Prosecution) ने कोर्ट के सामने इस मामले को बेहद मजबूती से रखा। न्यायालय ने पुलिस की एफआईआर और स्वर्गीय पंकज गोयल के परिवाद, दोनों मामलों को एक साथ जोड़कर (क्लब करके) विचारण में लिया।
सुनवाई के दौरान फरियादी पक्ष और शासन की ओर से ऐसे अकाट्य और वैज्ञानिक साक्ष्य (दस्तावेजी सबूत) पेश किए गए, जिससे यह साबित हो गया कि आरोपी ने सिर्फ जमीन हड़पने की नीयत से ही कागजों में हेरफेर किया था। इस बेहद संवेदनशील और तकनीकी मामले में शासन की ओर से एजीपी भूरेसिंह भदौरिया और एजीपी सत्यनारायण चौधरी ने दमदार पैरवी की, जिसके आगे आरोपी के वकीलों की एक न चली और अंततः न्यायालय ने आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।

नर्मदा गौरव न्यूज़ की अपील: सरकारी या निजी जमीन की खरीदी-बिक्री करते समय उप-पंजीयक कार्यालय (रजिस्ट्रार ऑफिस) के मूल रिकॉर्ड और खसरा-खतौनी की ऑनलाइन जांच जरूर करें, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

रिपोर्ट नर्मदा गौरव न्यूज़ जिला नर्मदा पुर मध्य प्रदेश

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