शिक्षा विभाग का शर्मनाक चेहरा: आदिवासी बच्चों के भविष्य पर ‘शराबी’ शिक्षक का प्रहार, मासूम से अभद्रता और बर्बरता की हदें पार

केसला/ इटारसी।
शिक्षा के मंदिर को कलंकित और गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को तार-तार करने वाला एक बेहद सनसनीखेज और शर्मनाक मामला सामने आया है। ज़िला नर्मदापुरम के आदिवासी बहुल ब्लॉक केसला के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला ‘नया रतिबंदर’ में एक शिक्षक की हैवानियत और घोर लापरवाही ने पूरे शिक्षा विभाग का सिर शर्म से झुका दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल में पदस्थ शिक्षक गोपाल गिरी गोस्वामी पर शराब के नशे में धुत होकर स्कूल आने, एक मासूम आदिवासी बालिका के साथ गलत तरीके से छूने (गंदा कृत्य करने का प्रयास) और विरोध करने पर बच्चों को जूतों से पीटने का बेहद गंभीर आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में इस कथित शिक्षक की शर्मनाक करतूतें साफ़ देखी जा सकती हैं, जहाँ एक तस्वीर में वह नशे की हालत में स्कूल के फर्श पर बेसुध पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
मासूमों पर बर्बरता: रक्षक ही बना भक्षक
आदिवासी अंचलों में जहाँ सरकारें बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं मैदानी हकीकत दिल दहला देने वाली है। जो शिक्षक बच्चों का मार्गदर्शक होना चाहिए था, वह शराब के नशे में चूर होकर मासूमों की अस्मत और सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा है।
- मासूम बालिका से अभद्रता: आरोपी शिक्षक ने शराब के नशे में एक मासूम छात्रा को गलत नीयत से छूने और उसके साथ अश्लील कृत्य करने का प्रयास किया।
- जूतों से बेरहमी से पिटाई: जब बच्चों ने विरोध किया या उसकी इस हालत को देखा, तो आरोपी शिक्षक ने अपनी मर्यादा भूलकर बच्चों को जूतों से बेरहमी से पीटा।
आदिवासी समाज में भारी आक्रोश, उठ रहे हैं तीखे सवाल
इस घटना के बाद से स्थानीय आदिवासी समुदाय और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं—“ऐसे लोगों का समाज और शिक्षा व्यवस्था में क्या काम?”
क्या आदिवासी इलाकों के बच्चों को केवल इसलिए इस बर्बरता का शिकार होना पड़ेगा क्योंकि वे सुदूर अंचलों में रहते हैं? शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग टीम आख़िर सोई हुई क्यों थी? क्यों ऐसे चरित्रहीन और शराबी व्यक्तियों को देश के भविष्य को संवारने की ज़िम्मेदारी सौंप दी जाती है?
कड़ी कार्रवाई की मांग
यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर पोक्सो एक्ट (POCSO Act) और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संगीन जुर्म है। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि आरोपी शिक्षक गोपाल गिरी गोस्वामी को तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए और उसे सलाखों के पीछे भेजकर सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में कोई भी बच्चों के भविष्य और अस्मत के साथ ऐसा घिनौना मज़ाक न कर सके।विशेष रिपोर्ट नर्मदा गौरव न्यूज़ मध्य प्रदेश
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