ईरान-अमेरिका युद्धविराम: ओवैसी का मोदी सरकार पर वार, कहा- ‘भारत ने खो दिया ग्लोबल लीडर बनने का मौका’

नई दिल्ली/हैदराबाद: अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम ने जहां दुनिया को राहत दी है, वहीं भारत में इस पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को घेरते हुए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ओवैसी का तर्क है कि भारत ने पश्चिम एशिया के इस संकट में अपनी ऐतिहासिक ‘निष्पक्षता’ को ताक पर रखकर अपनी साख को नुकसान पहुँचाया है
मध्यस्थ’ की भूमिका से पीछे हटा भारत?हैदराबाद सांसद ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारत कभी दुनिया में शांति का अग्रदूत माना जाता था। दक्षिण एशिया की सबसे मजबूत आवाज होने के नाते, भारत के पास वह रसूख था कि वह दोनों महाशक्तियों को बातचीत की मेज पर ला सके। लेकिन ओवैसी के मुताबिक, वर्तमान सरकार के झुकाव ने भारत की उस ‘न्यूट्रल अंपायर’ वाली छवि को धुंधला कर दिया है।
”भारत की क्षमता शांति स्थापित करने वाली रही है, लेकिन हमने खुद को उस स्थिति से दूर कर लिया जहाँ हम एक निर्णायक भूमिका निभा सकते थे।” — असदुद्दीन ओवैसी
इजरायल दौरे पर पुराने जख्मों को कुरेदा
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली इजरायल यात्रा का जिक्र करते हुए टाइमिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र में हालात इतने संवेदनशील थे, तब उस दौरे ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब ‘गुटनिरपेक्ष’ (Non-Aligned) नहीं रहा। ओवैसी का मानना है कि इसी एकतरफा नीति की वजह से आज जब युद्धविराम की बात हो रही है, तो भारत उस चर्चा के केंद्र में नहीं है जहाँ उसे होना चाहिए था
मुख्य बिंदु: ओवैसी के आरोपों का सार
कमजोर पड़ती कूटनीति: ओवैसी के अनुसार, भारत ने पश्चिम एशिया में मध्यस्थता करने की अपनी नैतिक शक्ति खो दी है।
अस्थायी शांति: उन्होंने मौजूदा युद्धविराम को बेहद ‘नाजुक’ करार दिया और लंबी अवधि की शांति के लिए भारत की अनुपस्थिति पर चिंता जताई।
छवि का नुकसान: सांसद का दावा है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर अपनी वह पुरानी पहचान खो रहा है जहाँ उसे हर पक्ष सम्मान की नजर से देखता था
निष्कर्ष:ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपनी ‘विश्वगुरु’ की छवि को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह है कि विदेश मंत्रालय और भाजपा ओवैसी के इन तीखे कूटनीतिक हमलों का क्या जवाब देते हैं।

