रक्षक ही बने भक्षक: नर्मदापुरम में फॉरेस्ट SDO पर आदिवासियों को ‘थर्ड डिग्री टॉर्चर’ और ‘इलेक्ट्रिक शॉक’ देने का संगीन आरोप!

नर्मदापुरम (केसला): मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से खाकी और रसूख के दुरुपयोग का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। केसला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भोबदा रैयत और चिंचवानी के दो आदिवासियों ने वन विभाग के SDO अनिल विश्वकर्मा पर बंधक बनाकर बर्बरतापूर्वक मारपीट और बिजली के झटके देने के गंभीर आरोप लगाए हैं

क्या है पूरा मामला? पीड़ित रामचरण चौहान और डोरीलाल लविष्कार ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में रूह कंपा देने वाली आपबीती सुनाई है। शिकायत के अनुसार:

अवैध हिरासत: 31 मार्च 2026 को उन्हें पूछताछ के बहाने खोहरा नाके से उठाकर जबरन बानापुरा रेंज ऑफिस ले जाया गया।

​●अमानवीय प्रताड़ना: पीड़ितों का आरोप है कि लकड़ी बेचने का झूठा जुर्म कबूल करवाने के लिए उन्हें तीन दिनों (72 घंटे) तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उन्हें गंदी गालियां दी गईं, जातिगत अपमान किया गया और इलेक्ट्रिक शॉक (करंट) लगाकर ‘थर्ड डिग्री टॉर्चर’ दिया गया।

आरोप है कि प्रताड़ना से टूट जाने के बाद उनसे जबरन तीन कोरे कागजों पर साइन कराए गए और फिर कोर्ट में पेश किया गया।

शरीर पर चीख रहे हैं जख्मों के निशान​ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में पीड़ितों के शरीर पर बेरहमी से हुई मारपीट के गहरे नीले निशान साफ देखे जा सकते हैं। यह निशान उस ‘सिस्टम’ पर सवालिया निशान लगा रहे हैं, जिसका काम जनता की सुरक्षा करना है।

SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग

पीड़ितों ने थाना प्रभारी केसला और पुलिस अधीक्षक (SP) नर्मदापुरम से न्याय की गुहार लगाई है। मांग की गई है कि आरोपी SDO अनिल विश्वकर्मा और उनके साथियों के खिलाफ SC-ST एक्ट, मारपीट, और अवैध हिरासत की धाराओं के तहत तुरंत FIR दर्ज की जाए।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *