सियासी घमासान: सिवनी मालवा में ‘वर्चस्व’ की जंग, एल्डरमैन नियुक्तियों में जिलाध्यक्ष का पलड़ा भारी, विधायक और नपाध्यक्ष पिछड़े!?

सिवनी मालवा | नगर पालिका चुनाव से ठीक पहले भाजपा के भीतर की ‘अंदरूनी गुटबाजी’ अब सरेआम हो गई है। हाल ही में घोषित हुए 6 एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की सूची ने यह साफ कर दिया है कि संगठन और सत्ता के बीच ‘क्रेडिट वॉर’ चरम पर है। कहने को तो यह नियुक्तियां संगठन को मजबूत करने के लिए हैं, लेकिन सूची की गहराई में झांकें तो यहां जिलाध्यक्ष प्रीति शुक्ला का सीधा दबदबा नजर आ रहा है, जबकि विधायक और नपाध्यक्ष के खेमों को मन मसोसकर समझौता करना पड़ा है।
3-2-1 का समीकरण: जिलाध्यक्ष की ‘हैट्रिक’राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार जिलाध्यक्ष प्रीति शुक्ला ने अपनी फील्डिंग ऐसी सजाई कि विधायक और नपाध्यक्ष देखते रह गए।
जिलाध्यक्ष का कब्जा: कुल 6 नामों में से 3 नाम (अभिषेक सोनी, चमन राठौर और अनीता बाथव) सीधे जिलाध्यक्ष खेमे के माने जा रहे हैं।विधायक की पसंद: विधायक के खाते में महज 2 नाम (कमलेश लोवंशी और हर्ष चौरड़िया) ही आ पाए।
नपाध्यक्ष का कोटा: नपाध्यक्ष रितेश जैन को सिर्फ 1 नाम (देवी कुशवाहा) से संतोष करना पड़ा।
टिकट कटा, पर रसूख बरकरारसबसे ज्यादा चर्चा अनीता बाथव के नाम की है। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष ने उन्हें पार्षद का टिकट दिलाने के लिए भी पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन तब दाल नहीं गली। अब एल्डरमैन बनाकर जिलाध्यक्ष ने जता दिया है कि संगठन में उन्हीं की चलती है। वहीं, अभिषेक सोनी की नियुक्ति को जिलाध्यक्ष की ‘मजबूत पसंद’ के तौर पर देखा जा रहा है।
विजय डरिया का नाम ‘वीटो’ का शिकार?सूत्रों की मानें तो वार्ड-4 से विजय डरिया का नाम लगभग तय था, जो दो बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन अंदरूनी खींचतान और ‘सहमति’ न बन पाने के कारण आखिरी वक्त पर उनका पत्ता काट दिया गया। इसे स्थानीय नेताओं की आपसी तकरार का नतीजा माना जा रहा है।
बगावत के सुर: अपनों ने ही उठाए सवालइस बंदरबांट के बाद भाजपा के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है:
विनय लोवंशी (नगर अध्यक्ष): इन्होंने सीधे बानापुरा क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप जड़ दिया है।
महेश गोयल (पूर्व मंडल अध्यक्ष): इनका तर्क है कि एल्डरमैन उन वार्डों से बनाने थे जहां पार्टी कमजोर है, ताकि संगठन को संजीवनी मिले। लेकिन यहाँ तो सिर्फ ‘करीबियों’ को रेवड़ियां बांटी गई हैं।
निष्कर्ष: एल्डरमैन की यह सूची आगामी नपा चुनाव में एकता का संदेश देने के बजाय ‘गुटबाजी’ की नई पटकथा लिखती नजर आ रही है। अब देखना यह है कि क्या यह ‘चुनिंदा’ चेहरे भाजपा को चुनावी समर में जीत दिला पाएंगे या आपसी कलह की भेंट चढ़ जाएंगे?

